𑒔𑒝𑓂𑒛𑒲𑒬𑒰𑒣𑒫𑒱𑒧𑒼𑒔𑒢𑓀 – चण्डीशापविमोचनं

𑒔𑒝𑓂𑒛𑒲𑒬𑒰𑒣𑒫𑒱𑒧𑒼𑒔𑒢𑒧𑒢𑓂𑒞𑓂𑒩𑒮𑓂𑒨 𑒫𑒬𑒱𑒭𑓂𑒚𑒢𑒰𑒩𑒠 𑒮𑒰𑒧𑒫𑒹𑒠𑒰𑒡𑒱𑒣𑒞𑒱𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧𑒰𑒝 𑒇𑒭𑒨𑓁 𑒮𑒩𑓂𑒫𑓂𑒫𑒻𑒬𑓂𑒫𑒩𑓂𑒨𑓂𑒨𑒏𑒰𑒩𑒱𑒝𑒲 𑒬𑓂𑒩𑒲𑒠𑒳𑒩𑓂𑒑𑒰 𑒠𑒹𑒫𑒞𑒰 𑒁𑒢𑒳𑒭𑓂𑒙𑒳𑒣𑒕𑒢𑓂𑒠𑒬𑓂𑒫𑒩𑒱𑒞𑒞𑓂𑒩𑒨𑓀 𑒥𑒲𑒖𑓀 𑒯𑓂𑒩𑒲𑒿 𑒬𑒏𑓂𑒞𑒱𑒩𑒴𑒣𑒱𑒝𑒲 𑒔𑒝𑓂𑒛𑒲 𑒬𑒰𑒣𑒫𑒱𑒧𑒼𑒔𑒢𑒹 𑒫𑒱𑒢𑒱𑒨𑒼𑒑𑓁 ।

चण्डीशापविमोचनमन्त्रस्य वशिष्ठनारद सामवेदाधिपतिब्रह्माण ऋषयः सर्व्वैश्वर्य्यकारिणी श्रीदुर्गा देवता अनुष्टुपछन्दश्वरितत्रयं बीजं ह्रीँ शक्तिरूपिणी चण्डी शापविमोचने विनियोगः ।

𑓇 𑒩𑒲𑒿 𑒩𑒹𑒞𑓁 𑒮𑓂𑒫𑒩𑒴𑒣𑒰𑒨𑒻 𑒧𑒡𑒳𑒏𑒻𑒙𑒦𑒧𑒩𑓂𑒠𑓂𑒠𑒱𑒢𑓂𑒨𑒻 𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧𑒬𑒰𑒣𑒫𑒱𑒧𑒳𑒏𑓂𑒞𑒰 𑒦𑒫 ।
𑓇 𑒬𑓂𑒩𑒲𑒿 𑒥𑒳𑒠𑓂𑒡𑒱𑒩𑒴𑒣𑒱𑒝𑓂𑒨𑒻 𑒧𑒯𑒱𑒭𑒰𑒮𑒳𑒩𑒮𑒻𑒢𑓂𑒨 𑒢𑒰𑒬𑒱𑒢𑓂𑒨𑒻 𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧𑒬𑒰𑒣𑒫𑒱𑒧𑒳𑒏𑓂𑒞𑒰 𑒦𑒫 ॥

ॐ रीँ रेतः स्वरूपायै मधुकैटभमर्द्दिन्यै ब्रह्मशापविमुक्ता भव ।
ॐ श्रीँ बुद्धिरूपिण्यै महिषासुरसैन्य नाशिन्यै ब्रह्मशापविमुक्ता भव ॥

𑓇 𑒩𑒿 𑒩𑒏𑓂𑒞𑒩𑒴𑒣𑒱𑒝𑓂𑒨𑒻 𑒧𑒯𑒱𑒭𑒰𑒮𑒳𑒩𑒧𑒩𑓂𑒠𑓂𑒠𑒱𑒢𑓂𑒨𑒻 𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧𑒬𑒰𑒣𑒫𑒱𑒧𑒳𑒏𑓂𑒞𑒰 𑒦𑒫 ॥
𑓇 𑒏𑓂𑒭𑒳𑒿 𑒏𑓂𑒭𑒳𑒡𑒰𑒩𑒴𑒣𑒱𑒝𑓂𑒨𑒻 𑒠𑒹𑒫𑒫𑒢𑓂𑒠𑒱𑒢𑓂𑒨𑒻 𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧𑒬𑒰𑒣𑒫𑒱𑒧𑒳𑒏𑓂𑒞𑒰 𑒦𑒫 ॥

ॐ रँ रक्तरूपिण्यै महिषासुरमर्द्दिन्यै ब्रह्मशापविमुक्ता भव ॥
ॐ क्षुँ क्षुधारूपिण्यै देववन्दिन्यै ब्रह्मशापविमुक्ता भव ॥

𑓇 𑒕𑒰𑒿 𑒕𑒰𑒨𑒰𑒩𑒴𑒣𑒱𑒝𑓂𑒨𑒻 𑒠𑒴𑒞𑒮𑒫𑓂𑒫𑒰𑒿𑒠𑒱𑒢𑓂𑒨𑒻 𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧𑒬𑒰𑒣𑒫𑒱𑒧𑒳𑒏𑓂𑒞𑒰 𑒦𑒫 ।
𑓇 𑒬𑓂𑒩𑒲𑒿 𑒬𑒏𑓂𑒞𑒱𑒩𑒴𑒣𑒱𑒝𑓂𑒨𑒻 𑒡𑒴𑒧𑓂𑒩𑒪𑒼𑒔𑒢𑒒𑒰𑒞𑒱𑒢𑓂𑒨𑒻 𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧𑒬𑒰𑒣𑒫𑒱𑒧𑒳𑒏𑓂𑒞𑒰 𑒦𑒫 ॥

ॐ छाँ छायारूपिण्यै दूतसव्वाँदिन्यै ब्रह्मशापविमुक्ता भव ।
ॐ श्रीँ शक्तिरूपिण्यै धूम्रलोचनघातिन्यै ब्रह्मशापविमुक्ता भव ॥

𑓇 𑒞𑒵 𑒞𑒵𑒭𑓂𑒝𑒰𑒩𑒴𑒣𑒱𑒝𑓂𑒨𑒻 𑒔𑒝𑓂𑒛𑒧𑒳𑒝𑓂𑒛𑒥𑒡𑒏𑒰𑒩𑒱𑒝𑓂𑒨𑒻 𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧𑒬𑒰𑒣𑒫𑒱𑒧𑒳𑒏𑓂𑒞𑒰 𑒦𑒫 ॥
𑓇 𑒏𑓂𑒭𑒰𑒿 𑒏𑓂𑒭𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑒴𑒣𑒱𑒝𑓂𑒨𑒻 𑒩𑒏𑓂𑒞𑒥𑒲𑒖𑒥𑒡𑒏𑒰𑒩𑒱𑒝𑓂𑒨𑒻 𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧𑒬𑒰𑒣𑒫𑒱𑒧𑒳𑒏𑓂𑒞𑒰 𑒦𑒫 ||

ॐ तृ तृष्णारूपिण्यै चण्डमुण्डबधकारिण्यै ब्रह्मशापविमुक्ता भव ॥
ॐ क्षाँ क्षान्तिरूपिण्यै रक्तबीजबधकारिण्यै ब्रह्मशापविमुक्ता भव ||

𑓇 𑒖𑒰𑒿 𑒖𑒰𑒞𑒱𑒩𑒴𑒣𑒱𑒝𑓂𑒨𑒻 𑒢𑒱𑒬𑒳𑒧𑓂𑒦𑒫𑒡𑒏𑒰𑒩𑒱𑒝𑓂𑒨𑒻 𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧𑒬𑒰𑒣𑒫𑒱𑒧𑒳𑒏𑓂𑒞𑒰 𑒦𑒫 ॥
𑓇 𑒪𑒿 𑒪𑒖𑓂𑒖𑒰𑒩𑒴𑒣𑒱𑒝𑓂𑒨𑒻 𑒬𑒳𑒧𑓂𑒦𑒫𑒡𑒏𑒰𑒩𑒱𑒝𑓂𑒨𑒻 𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧𑒬𑒰𑒣𑒫𑒱𑒧𑒳𑒏𑓂𑒞𑒰 𑒦𑒫 ॥

ॐ जाँ जातिरूपिण्यै निशुम्भवधकारिण्यै ब्रह्मशापविमुक्ता भव ॥
ॐ लँ लज्जारूपिण्यै शुम्भवधकारिण्यै ब्रह्मशापविमुक्ता भव ॥

𑓇 𑒬𑒰𑒿 𑒬𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑒴𑒣𑒱𑒝𑓂𑒨𑒻 𑒠𑒹𑒫𑒮𑓂𑒞𑒳𑒞𑓂𑒨𑒻 𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧𑒬𑒰𑒣𑒫𑒱𑒧𑒳𑒏𑓂𑒞𑒰 𑒦𑒫 ॥
𑓇 𑒬𑓂𑒩𑒿 𑒬𑓂𑒩𑒠𑓂𑒡𑒰𑒩𑒴𑒣𑒱𑒝𑓂𑒨𑒻 𑒤𑒪𑒠𑒰𑒞𑓂𑒩𑓂𑒨𑒻 𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧𑒬𑒰𑒣𑒫𑒱𑒧𑒳𑒏𑓂𑒞𑒰 𑒦𑒫 ॥

ॐ शाँ शान्तिरूपिण्यै देवस्तुत्यै ब्रह्मशापविमुक्ता भव ॥
ॐ श्रँ श्रद्धारूपिण्यै फलदात्र्यै ब्रह्मशापविमुक्ता भव ॥

𑓇 𑒏𑒰𑒿 𑒏𑒰𑒢𑓂𑒞𑒱𑒩𑒴𑒣𑒱𑒝𑓂𑒨𑒻 𑒩𑒰𑒖𑒫𑒩𑒠𑒰𑒞𑓂𑒩𑓂𑒨𑒻 𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧𑒬𑒰𑒣𑒫𑒱𑒧𑒳𑒏𑓂𑒞𑒰 𑒦𑒫 ॥
𑓇 𑒧𑒰𑒿 𑒧𑒰𑒞𑒵𑒩𑒴𑒣𑒱𑒝𑓂𑒨𑒻 𑒁𑒩𑓂𑒑𑒪𑒮𑒯𑒱𑒞𑒰𑒨𑒻 𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧𑒬𑒰𑒣𑒫𑒱𑒧𑒳𑒏𑓂𑒞𑒰 𑒦𑒫 ॥

ॐ काँ कान्तिरूपिण्यै राजवरदात्र्यै ब्रह्मशापविमुक्ता भव ॥
ॐ माँ मातृरूपिण्यै अर्गलसहितायै ब्रह्मशापविमुक्ता भव ॥

𑓇 𑒯𑓂𑒩𑒲𑒿 𑒬𑓂𑒩𑒲𑒿 𑒯𑒴𑒿 𑒠𑒳𑒩𑓂𑒑𑒰𑒨𑒻 𑒮𑒩𑓂𑒫𑓂𑒫𑒻𑒬𑓂𑒫𑒩𑓂𑒨𑓂𑒨𑒏𑒰𑒩𑒱𑒝𑓂𑒨𑒻 𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧𑒬𑒰𑒣𑒫𑒱𑒧𑒳𑒏𑓂𑒞𑒰 𑒦𑒫 ॥
𑓇 𑒏𑓂𑒪𑒲𑒿 𑒯𑓂𑒩𑒲𑒿 𑓇 𑒢𑒧𑓁 𑒬𑒱𑒫𑒰𑒨𑒻 𑒁𑒦𑒹𑒠 𑒏𑒫𑒔𑒩𑒴𑒣𑒱𑒝𑓂𑒨𑒻 𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧𑒬𑒰𑒣𑒫𑒱𑒧𑒳𑒏𑓂𑒞𑒰 𑒦𑒫 ॥

ॐ ह्रीँ श्रीँ हूँ दुर्गायै सर्व्वैश्वर्य्यकारिण्यै ब्रह्मशापविमुक्ता भव ॥
ॐ क्लीँ ह्रीँ ॐ नमः शिवायै अभेद कवचरूपिण्यै ब्रह्मशापविमुक्ता भव ॥

𑓇 𑒏𑒰𑒪𑓂𑒨𑒻 𑒏𑒰𑒪𑒱 𑒯𑓂𑒩𑒲𑒿 𑒤𑒙𑓂𑒮𑓂𑒫𑒰𑒯𑒰𑒨𑒹 𑒇𑒑𑓂𑒫𑒹𑒠𑒩𑒴𑒣𑒱𑒝𑓂𑒨𑒻 𑒥𑓂𑒩𑒯𑓂𑒧𑒬𑒰𑒣𑒫𑒱𑒧𑒳𑒏𑓂𑒞𑒰 𑒦𑒫 ॥
𑒃𑒞𑓂𑒨𑒹𑒫𑓀 𑒯𑒱 𑒧𑒯𑒰𑒧𑒢𑓂𑒞𑓂𑒩𑒰𑒢𑓂 𑒣𑒚𑒱𑒞𑓂𑒫𑒰 𑒣𑒩𑒧𑒹𑒬𑓂𑒫𑒩𑒱 । 𑒔𑒝𑓂𑒛𑒲𑒣𑒰𑒚𑓀 𑒠𑒱𑒫𑒰𑒩𑒰𑒞𑓂𑒩𑒾 𑒏𑒳𑒩𑓂𑒨𑒰𑒠𑒹𑒫 𑒢 𑒮𑓀𑒬𑒨𑓁 ॥

ॐ काल्यै कालि ह्रीँ फट्स्वाहाये ऋग्वेदरूपिण्यै ब्रह्मशापविमुक्ता भव ॥
इत्येवं हि महामन्त्रान् पठित्वा परमेश्वरि । चण्डीपाठं दिवारात्रौ कुर्यादेव न संशयः ॥

𑒋𑒫𑓀 𑒧𑒢𑓂𑒞𑓂𑒩𑒢𑓂𑒢 𑒖𑒰𑒢𑒰𑒞𑒱 𑒔𑒝𑓂𑒛𑒲𑒣𑒰𑒚𑓀 𑒏𑒩𑒼𑒞𑒱 𑒨𑓁 । 𑒂𑒞𑓂𑒧𑒢𑒬𑓂𑒔𑒻𑒫 𑒠𑒰𑒞𑒵𑒝𑒰𑓀 𑒏𑓂𑒭𑒨𑓀 𑒏𑒳𑒩𑓂𑒨𑒰𑒢𑓂𑒢 𑒮𑓀𑒬𑒨𑓁 ॥
𑒃𑒞𑒱 𑒩𑒳𑒠𑓂𑒩𑒨𑒰𑒧𑒪𑒹 𑒔𑒝𑓂𑒛𑒲𑒬𑒰𑒣𑒫𑒱𑒧𑒼𑒔𑒢𑓀 𑒮𑒧𑓂𑒣𑒴𑒩𑓂𑒝𑒧𑓂 || ॥

ति चण्डीपाठं करोति यः । आत्मनश्चैव दातृणां क्षयं कुर्यान्न संशयः ॥
इति रुद्रयामले चण्डीशापविमोचनं सम्पूर्णम् || ॥

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